29 फ़रवरी 2020 - 19:17
क्या आत्मघाती रणनीति पर अमल करने जा रहे हैं अर्दोग़ान, इदलिब में लगातार गिर रही हैं तुर्क सैनिकों की लाशें, बेहद कठिन विकल्पों म

तुर्की ने सीरियाई सेना को सीरियाई इलाक़े इदलिब से पीछे हटने के लिए जो मोहलत दी थी वह शनिवार को समाप्त हो रही है, अब तक की लड़ाई में तुर्क सेना का जानी नुक़सान बढ़ता जा रहा है।

गुरुवार की लड़ाई में कम से कम 29 तुर्क सैनिक मारे गए हैं जबकि उसके द्वारा समर्थित चमरंपथी संगठनों के 50 से अधिक लड़ाके हताहत हो गए हैं। यह तुर्क सेना ही नहीं राष्ट्रपति अर्दोग़ान की सरकार पर बहुत बड़ा तामाचा है। उधर रूस के साथ तुर्की की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। इन हालात का मतलब यह है कि आने वाले दिनों में लड़ाई और तेज़ तथा निर्णायक हो जाएगी।

रूसी राष्ट्रपति ने इदलिब के बारे में तुर्की के साथ किसी भी प्रकार की शिखर बैठक से इंकार किया है जिससे यही लगता है कि तुर्की द्वारा दी गई चेतावनी को वह गंभीरता से नहीं लेते और तुर्क सेना से युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सवाल यह है कि इदलिब सीरिया का इलाक़ा है जहां तुर्की द्वारा समर्थित चरमपंथियों का क़ब्ज़ा है इस इलाक़े के चरमपंथियों के क़ब्ज़े से निकल कर सीरियाई सेना के नियंत्रण में जाने से रोकने के लिए तुर्की युद्ध जैसा बड़ा जोखिम क्यों उठा रहा है?

इसकी एक वजह तो राष्ट्रपति अर्दोग़ान की ज़िद और अकड़ है। वह अपने आप को हारा हुआ हरगिज़ नहीं ज़ाहिर करना चाहते। वह अब भी सहन नहीं कर पा रहे हैं कि सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद को सत्ता से हटाने की उनकी 9 साल की कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला।

दूसरी वजह यह है कि अर्दोग़ान की प्राथमिकता यह है कि इदलिब के इलाक़े में इस्लामी ख़िलाफ़त जैसा शासन स्थापित हो जाए जो चरमपंथी संगठनों के नियंत्रण में रहे और वह सीरियाई शरणार्थी जो इस इलाक़े से तुर्की में गए हैं इसी ख़िलाफ़त वाले इलाक़े में बस जाएं।

तीसरा कारण यह है कि अर्दोग़ान की अब समझ में ही नहीं आ रहा है कि उन चरमपंथी संगठनों का क्या करें जिनका उन्होंने गठन करवाया था और जो इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने में कामयाब हो गए थे। इन संगठनों की संख्या दर्जनों में है। अगर अर्दोग़ान इदलिब में जारी सीरियाई सेना के आप्रेशन पर ख़ामोश रहते हैं और यह इलाक़े पूरी तरह आज़ाद हो जाते हैं तो चरमपंथी संगठन अर्दोग़ान पर ग़द्दारी का आरोप लगाकर तुर्की के भीतर घुस जाएंगे और वहां आतंकी हमले शुरू कर देंगे।

तुर्की के भीतर विपक्षी दल ही नहीं आम जनता यहां तक कि तुर्क सेना के एक बड़े भाग में भी यह सोच पनप रही है कि चरमपंथी संगठनों के लिए अर्दोग़ान बहुत बड़ा जोखिम मोल ले रहे हैं। अर्दोग़ान को यह रणनीति तत्काल बदल देना चाहिए क्योंकि इससे सेना का भारी नुक़सान हो रहा है।

आने वाले दिनों में क्या होगा यह कह पाना तो कठिन है लेकिन इतना तो ज़रूर है कि तुर्की ने मोहलत समाप्त होने के बाद ताक़त का इस्तेमाल करके सीरियाई सेना को इदलिब के पूरे इलाक़े से पीछे ढकेल देने की जो धमकी दी थी अगर अर्दोगान ने उस पर अमल करने की कोशिश की तो उन्हें बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है।

रजब तैयब अर्दोग़ान बहुत कठिन परिस्थितियों में हैं और हो सकता है कि वह सीरियाई सेना के ख़िलाफ़ व्यापक युद्ध का एलान करके आत्मघाती रणनीति पर अमल करें मगर इस स्थिति में उन्हें रूस से भी सीधे तौर पर टकराना पड़ेगा।

आख़िर में क्या होगा इस बारे में अलग अलग विचार पेश किए जा रहे हैं लेकिन हमें तो सबसे सही बात पश्चिमी टीकाकार की लगती है कि इदलिब की लड़ाई में राष्ट्रपति बश्शार असद कुछ नए इलाक़ों को आज़ाद कराएंगे और अर्दोग़ान को तुर्की की सीमा के भीतर नए शरणार्थियों को जगह देनी पड़ेगी।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के जाने माने टीकाकार